रक्षा बंधन का इतिहास इन हिंदी और इंग्लिश

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रक्षाबंधन हिन्दुओं के महतवपूर्ण त्योहारों में से एक है तथा यह त्यौहार भारत के विभिन्न राज्यों में मनाया जाता है l Raksha Bandhan is one of the important festivals of Hindus and this festival is celebrated in different states of India.

रक्षा बंधन का इतिहास इन हिंदी और इंग्लिश

रक्षा बंधन का इतिहास :

सावन का महीना आते ही दुनिया भर के भारतीय राखी का दिन जानने के लिए उत्सुक हो जाते है कोई भी रिस्तेदारी न होने के बावजूद भी राखी से भाई- बहन का बंधन निभाने का मौका मिलता है l राखी का इतिहास तो हमें महाभारत के युग से देखने को मिलता है l भगवान् श्रीकिरसन की श्रितदेवी नाम की एक चाची थी l जिसने शिशुपाल नामक एक विकृत बच्चे को जन्म दिया, बड़ो से पता चलता है की जिसके स्पर्श से शिशुपाल स्वस्थ होगा होगा उसी के हाथो वह मारा जाएगा l एक दिन श्रीकिरसन अपनी चाची के घर आये थे l श्रितदेवी ने अपने बेटे को श्रीकिरसन के हाथो में रखा तो वह बच्चा ठीक हो गया l श्रितदेवी यह बदलाव देखकर खुस हो गयी लेकिन उसकी मौत श्रीकिरसन के हाथो होने की संभावना से वह विचलित हो गई l वह भगवान् श्रीकिरसन से प्रार्थना करने लगी की भले की शिशुपाल कोई भी गलती करे उसको श्रीकिरसन के हाथो सजा नहीं मिलनी चाहिए और भगवान् श्रीकिरसन ने उससे वादा किया कि मेँ उसकी गलतियों को माफ़ कर दूंगा लेकिन वह अगर १०० से ज्यादा गलती करता है तो में उसको माफ़ नहीं करूँगा और में उसको जरूर सजा दूंगा l शिशुपाल बड़ा होकर एक चेदि नामक एक राज्य का राजा बन गया वो एक राजा भी था और भगवान् श्रीकिरसन का रिस्तेदार भी था l लेकिन वो बहुत कुरूर राजा बन गया और वो अपने राज्य के लोगो को बहुत सताने लगा और श्रोकिरसन को भी चुनौती देने लगा l एक समय तो उसने भरी राज्य सभा में श्रीकिरसन की निंदा की तो बस शिशुपाल ने उस दिन १०० गलतियों की सीमा पlर कर दी थी तुरंत भगवान् श्रीकिरसन ने अपने सुदरसन चक्र का शिशुपाल के ऊपर प्रयोग किया l इसी तरह से बहुत चेतावनी मिलने के बाद भी शिशुपाल ने अपने गुण नहीं बदले और अंत में उसे अपनी सजा भुगतनी पड़ी थी l

भगवान् श्रीकिरसन जब क्रोघ में अपने सुदरसन चक्र को जब छोड़ रहे थे तो उनकी ऊँगली में भी काफी चोट लगी जब भगवान् श्रीकिरसन को चोट लगी तो आस पास क लोग उस चोट पर कुछ बांधने के लिए भागने लगे l वहां पर खड़ी द्रोपदी कुछ सोचे समझे बिना ही अपनी साड़ी के एक कोने को फाड़ कर भगवान् श्रीकिरसन की चोट लगी हुई ऊँगली पर बाँध दी तो फिर भगवान् श्रीकिरसन कहने लगे की सुक्रिया मेरी बहना तुमने मेरे कष्ट में साथ दिया है तो में भी तुम्हारे कष्ट में साथ देने का वादा करता हूँ l यह कह कर भगवान् श्रीकिरसन ने द्रोपती की रक्षा करने का वादा किया l

इस घटना से ही रक्षा बंधन का प्रारम्भ शुरू हुआ l और जब बाद में कौरवों ने पूरी राज्यसभा के सामने द्रोपदी की साड़ी खींचकर उसका अपमान करने का साहस किया तो भगवान् श्रीकिरसन ने द्रोपदी का अपमान बचाकर अपना किया हुआ वादा पूरा किया था l

उस समय से ही अब तक बहने अपने भाइयो को राखी बांध रही है और बदले में ही भाई अपनी बहनो की रक्षा करने का वादा करते हुए आ रहे हैं l

History Of Raksha Bandhan :

As the month of Savan arrives, the Indians around the world are eager to know the day of Rakhi, despite having no rigidity, Rakhi gets an opportunity to fulfill the bondage of brother and sister in the history of Rakhi, to see us from the era of Mahabharata Get. Lord Sri Krishna had a aunt named shritdevi, who gave birth to a perverted child named shishupala, the elder knows that with the touch of which shishupala will be healthy, he will be killed by him, one day Sri Krishna came to his aunt’s house. Shritdevi kept his son in the hands of    lord Sri Krishna. The child was cured. Seeing this change, he became scared, but he was disturbed by the possibility of his death being done by lord Sri Krishna . He started praying to god Sri Krishna, he should not be punished by god Sri Krishna And lord Sri Krishna promised him that I will forgive his mistakes but if he makes more than 100 mistakes then I will not forgive him and I will definitely punish him. shishupala grew up and became a king of a kingdom named chadhi. He was also a king and lord Sri Krishna was also the relative but he became a very cruel king and he began to attack the people of his state and also challenged Sri Krishna. At one time, he condemned Sri Krishna in the rajya sabha shishupala had made that day on the limit of 100 mistakes. Immediately lord Sri Krishna used his sudarshan chakra on the shishupala. Even after getting very warnings, shishupala did not change his qualities and in the end he had to face his punishment.

Lord Sri Krishna when leaving his sudarshan chakra in anger, his finger hurt too much when lord Sri Krishna was hurt, so people around him started to run on some of the injuries, while standing there, droopadi standing there without thinking anything. Tearing a corner of his sari and tie the finger of god Sri Krishna on the finger,then lord Sri Krishna began to say that thank u was my sister and you supported me in my trouble. So I promise to give you the support of your suffering. By saying this, lord Sri Krishna promised to protect the droopadi.

This incident started with the beginning of raksha bandhan and when the Korwo dared to insult him by dragging the saris of droopadi in front of the entire rajya sabha, Lord Sri Krishna had fulfilled his promised.

Since that time, it has been stuck in the rakhis for the brothers flowing till now, and in return only brothers are coming to promise to protect their sisters.

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