जानिए क्यों मनाई जाती है ईद: रमजान के नियम और महत्व

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ईद उल फितर हिजरी कैलेंडर के दसवे महिने के पहले दिन मनाई जाती है और महीने की शुरुआत चाँद देखकर ही की जाती है। कहा जाता है कि सन 2624 ईo में पहली ईद मनाई गयी थी, ईद मानाने के पीछे एक सच्ची घटना भी है। पैगंबर हज़रात मोहम्मद ने बद्र के युद्ध में जीत प्राप्त की थी, जिस दिन हज़रात मोहम्मद ने पहली जीत प्राप्त की थी उसी दिन पहली ईद मनाई गयी थी, तभी से ही इस्लामिक देशों में ईद का पवित्र त्यौहार बड़े ही धून-धाम से मनाया जाता है। परन्तु भारत देश इस्लामिक देश नहीं है लेकिन यहां पर सभी धर्मों के लोग रहते है जो कि यहाँ के रहने वाले लोग एक-दूसरे से आपस में भाई-चारा व् एकता के बंधन में बंधे हुए है। इसलिए भारत देश में ईद को पवित्र पर्व माना गया है, तथा आपस में बड़ी धूम-धाम से इस पर्व का आनंद उठाते है।

इस दिन इस्लाम धर्म के लोग ईदगाह में जाकर नमाज़ अदा करते है तथा इस्लाम धर्म में ईद-उल फितर के दिन फ़र्ज़ अदा करने का दिन भी होता है। इस दिन इस्लाम धर्म के लोग अपनी अपनी हैसियत के हिसाब से लोगों को दान किया करते है। इस्लाम धर्म में ईद- उल फितर को सबसे पवित्र त्यौहार माना जाता है।

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एक माह के रमज़ान समाप्त होने के बाद ही ईद-उल फितर का पवित्र त्यौहार आता है। रमज़ान का अपना अलग ही महत्व होता है जो कि सम्पूर्ण विश्व के इस्लामिक देशों में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है, साथ ही भारत देश में भी रमज़ान महीने को बहुत ही पवित्र महीना माना गया है तथा यह भी कहा जाता है कि अल्लाह ने रमजान महीने में ही अपने बन्दों को कुरान शरीफ से नवाजा था। रमज़ान महीने की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि रमज़ान महीना सम्पूर्ण विश्व में अपने कठोर नियमों से जाना जाता है।

रमज़ान महीने में कठोर नियम

  1. रमज़ान के दिनों में तय समय से पहले रोजा खोलने के लिए किसी भी तरह का खान-पान का उपयोग करना अपराध माना गया है।
  2. रमज़ान के दिनों में रोजा खलने के लिए एक निश्चित समय है सुबह रोजा रखने से पहले हम कुछ भी खान-पान कर सकते है जिसको शेरी भी कहा जाता है तथा शाम को एक निश्चित समय पर ही रोजा खोला जाता है जिसको इफ्तार भी कहा जाता है।
  3. रमज़ान महीने में गलत आदतों से अपने आपको दूर रखने की सलाह दी गयी है जैसे शराब पीना, गुटखा व् पान का सेवन करना तथा किसी भी प्रकार को नशीली चीजों का सेवन करना सख्त मना है।
  4. रमज़ान के दिनों में किसी भी महिला को गलत नजरों से देखना मना है तथा रमज़ान महीने में अपने पत्नी के साथ भी सेक्स करना सख्त मना है।
  5. रमज़ान महीने में गर्भवती महिलाओं को रोजा रखने के लिए सख्त मना है।
  6. रमज़ान महीने में गलत भाषा का उपयोग करना मना है तथा इसके साथ ही किसी भी तरह की गलत भाषा को सुनना भी माना किया गया है।
  7. रमज़ान महीने में किसी भी तरह की लड़ाई करना भी रोजा रखने के खिलाफ माना गया है।
  8. रमज़ान महीने में इस्लाम धर्म के लोगों को साफ-साफ मना किया गया है कि अपने शरीर के किसी भी अंग का इस्तेमाल गलत कामों में न किया जाये।
  9. कहा जाता है कि रमज़ान के पवित्र महीने में लोगों को अपनी गलतीयों को कबूलने का मौका दिया जाता है ताकि गलती कबूलने के साथ अल्लाह से क्षमा मांग सके।
  10. रमज़ान के दिनों में रोजा रखने वालों लोगों को अपनी हैसियत के हिसाब से गरीब लोगों को दान भी करने को कहा गया है।

रमज़ान के महीने में ऐसे लोगों को रोजा न रखने के निर्देश

  1. बुजुर्ग लोगों को रोजा न रखने के लिए कहा गया है।
  2. रमज़ान माह में गर्भवती महिलाओं को रोजा न रखना सख्त मना है।
  3. ऐसे लोग जो आयु में छोटे अथवा बड़े है परन्तु किसी लम्बी बीमारी से ग्रस्त है ऐसे लोगों को रोजा रखना सख्त मना है।
  4. 5 वर्ष से कम आयु के लोगों को रोजा रखना मना है।
  5. ऐसे लोग जो श्रमिक श्रेणी में आते है तथा ऐसे लोगों को मजदूरी करने के साथ-साथ रोजा पूर्ण करने की समस्या सामने आती है जिससे कि ऐसे लोग रोजा रखने में असमर्थ हो जाते है इसलिए ऐसे लोगों को रोजा रखना सख्त मना है।

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